Sunday, September 21, 2014


क़यामत तक मोहब्बत

जिस दिन तुझसे मेरा हर इक नक्श जुदा हो जायेगा
तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम लिखा रह जायेगा

जब अन्जाने में कहीं मेरी कोई निशानी पाओगे
मेरी यादों के दामन से तुम भी लिपट तो जाओगे
जब तनहा तनहा रातों में बिस्तर पे करवट बदलोगे
तब आँखों में नींद ना होगी तुम मेरे सपनों को बुलाओगे
तुम लाख चाहो फिर भी दरमियाँ इक सिलसिला रह जाएगा

तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम लिख रह जायेगा...

जब सूरज चाँद सितारे सब जाने कहाँ खो जायेगे
जब जंगल के सारे जुगनू अपने घर लौट के जायेगे
जब नदिया का सागर से मिलने का ख़त्म सफ़र हो जाएगा
जब बागों में फूलों के गए मौसम नहीं लौट के आयेगे
उस दिन भी आँखों में मिलने का ख्वाब सजा रह जायेगा

तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम लिख रह जायेगा...

जिस दिन तुझसे मेरा हर इक नक्श जुदा हो जायेगा
तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम लिखा रह जायेगा

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