Sunday, September 21, 2014


क़यामत तक मोहब्बत

जिस दिन तुझसे मेरा हर इक नक्श जुदा हो जायेगा
तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम लिखा रह जायेगा

जब अन्जाने में कहीं मेरी कोई निशानी पाओगे
मेरी यादों के दामन से तुम भी लिपट तो जाओगे
जब तनहा तनहा रातों में बिस्तर पे करवट बदलोगे
तब आँखों में नींद ना होगी तुम मेरे सपनों को बुलाओगे
तुम लाख चाहो फिर भी दरमियाँ इक सिलसिला रह जाएगा

तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम लिख रह जायेगा...

जब सूरज चाँद सितारे सब जाने कहाँ खो जायेगे
जब जंगल के सारे जुगनू अपने घर लौट के जायेगे
जब नदिया का सागर से मिलने का ख़त्म सफ़र हो जाएगा
जब बागों में फूलों के गए मौसम नहीं लौट के आयेगे
उस दिन भी आँखों में मिलने का ख्वाब सजा रह जायेगा

तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम लिख रह जायेगा...

जिस दिन तुझसे मेरा हर इक नक्श जुदा हो जायेगा
तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम लिखा रह जायेगा

Sunday, September 7, 2014



क्या करूं तू बता ज़िन्दगी
चलते चलते थकी सांस भी
क्या करूं .......

जानता हूँ गया जो लौट आना नहीं
भूलता फिर भी गुज़रा ज़माना नहीं
याद आते हैं पल संग गुज़ारे कई
ऐसा लगता है हो बात ये कल की ही
जुगनू यादों के आँगन में उड़ने लगे
सारे अरमान दिल में बिखरने लगे
अजनबी हो गए ख्वाब भी
 क्या करूं तू बता ज़िन्दगी

कल बहारों के मौसम थे बरसात थी
दिलों में उमंगों की बारात थी
महकी महकी सी लगती थी सारी फ़ज़ा
उन गेशुओं को जो छु के गुजरती हवा
अब वो दिन अब वो मौसम हैं जाने कहाँ
बस अंधेरों में लिपटा है सारा जहाँ
रूठी है चांदनी, चाँद भी 
 क्या करूं .......

क्या करूं तू बता ज़िन्दगी
चलते चलते थकी सांस भी

क्या करूं .......